here is one ghazal for my readers...i m lil bit boring..as u know i hav'nt recieved any comment yet...
एक पगली मेरा नाम जो ले शरमाये भी घबराये भीगलियों गलियों मुझसे मिलने आये भी घबराये भीरात गये घर जाने वाली गुमसुम लड़की राहों मेंअपनी उलझी ज़ुल्फ़ों को सुलझाये भी घबराये भीकौन बिछड़ कर फिर लौटेगा क्यूँ आवारा फिरते होरातों को एक चाँद मुझे समझाये भी घबराये भीआने वाली रुत का कितना ख़ौफ़ है उसकी आँखों मेंजाने वाला दूर से हाथ हिलाये भी घबराये भी
Sunday, March 22, 2009
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